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Tuesday, 6 February 2018



धन - वृद्धि करने का प्रयोग - किसी शुभ दिन ' श्रीफल ' ले आयें और इसे धो - पोंछकर , लाल रंग के कपड़े में लपेटकर पवित्र स्थान ( पूजाघर ) में रख दें। फिर इस पर - सिंदूर , कपूर , लौंग , छोटी इलायची आदि चढ़ायें। इस पर कोई सिक्का आदि भी चढ़ा दें। फिर धुप - दीप से पूजा करें। उसके बाद में 11 माला इस मन्त्र का जप करें - ॐ श्रीं श्रियै नमः। 
फिर उसे किसी कटोरी में ( कपड़े सहित ) रख दें। उसकी प्रतिदिन पूजा करते रहें। कभी - कभी सिक्के भी चढ़ाते रहें।
इस प्रकार से पूजा करते रहने से - धन वृद्धि होती हैं और लक्ष्मीजी की पूर्ण कृपा प्राप्त होती हैं। धन - सम्पदा की वृद्धि के लिये यह प्रयोग बहुत ही सरल और प्रभावशाली है।

बक्से में रखें - उपरोक्त विधि से ' श्रीफल ' को यदि बक्से में रख दिया जाये तो उसमें मुद्रायें बढ़ने लगती हैं। किन्तु यह तथ्य भी ध्यान में रखना चाहिये कि उस बढ़ती हुई राशि से कभी पैसा निकलें नहीं , निकलने से वृद्धि रुक जाती है। समान्य खर्चे के लिये अलग पैसे रखे रहें श्रीफल के पैसे कभी न लें , बल्कि उस पर
कुछ - न - कुछ ( रुपया - दो रुपया ) चढ़ाते रहें। जब धीरे - धीरे काफी पैसे इकटठा हो जायें तो उस राशि को किसी शुभ एवं जनहितकारी कार्य ( जैसे - गरीब बच्चो के स्कूल की फीस , भूखों को भोजन , जरूरतमन्दों को कपड़े , प्याऊ लगवाना , बीमार जानवरों की सेवा आदि ) में खर्च कर दें। यह प्रयोग अनुभूत है और चमत्कारी प्रभाव देखता है।

गोलक में रखें - यदि आप 'श्रीफल ' को गोलक में रखना चाहते हैं तो उसमें भी रख सकते हैं।  'श्रीफल ' को गोलक में रखकर गोलक की प्रतिदिन धुप - दीप से पूजा करें। और उसमें पैसे भी डालते रहें। इस प्रयोग से वह अपेक्षाकृत कम समय में ही भर जायेगा।

अन्न भण्डार में - अन्न भण्डार ( अन्न के गोदाम ) में 'श्रीफल ' रखने से वह सदैव भरा ही रहता है। लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं है कि -  'श्रीफल ' रखने से अन्न की सुरक्षा ( कीड़े - मकोड़े , चूहों , आग , पानी आदि से ) भी होती रहेगी - इस  प्रकार के संकटों से तो अन्न की सुरक्षा का पर्याप्त इंतजाम करना ही चाहिये। लेकिन  'श्रीफल ' रखने से अन्न भण्डार में वृद्धि होती रहेगी -  इसका तात्पर्य यह है कि - अन्न का संग्रह करने की व्यवस्थयें बनती रहेंगी। वैसे भी सास्त्रों में लिखा है कि - अन्न का संग्रह ही सर्वश्रेष्ठ होता है -
                     
                                         धन्यानां संग्रहोः राजनुत्तमं सर्व संग्र्हात। 
                                       वुभुक्तं हि मुखे रत्नं न कुर्यात प्राण धारणाम।।


दुकान में रखें -  नवरात्रि के नौ दिनों में से किसी भी दिन अपनी दुकान , प्रतिष्ठान , कार्यालय - जहाँ भी
लेन - देन या कोई व्यवसाय होता हो , यह मन्त्र - सिद्ध ' श्रीफल ' किसी सुरक्षित स्थान पर रख दें। उसे नित्य
 धुप - दीप दें और कोई सिक्का चढ़ाते रहें। यह प्रयोग करने से उस प्रतिष्ठान - दुकानदार की आर्थिक - स्थिति में धीरे - धीरे बहुत अधिक सुधार होने लग जायेगा।

 




























Monday, 5 February 2018


आधाशीशी  का दर्द दूर करने के लिए -  यदि किसी व्यक्ति के सिर में आधाशीशी  (अर्धकपारी) का दर्द होता है तो -एक भोजपत्र लाकर उस पर अष्टगंघा से निम्नलिखित प्रकार से यंत्र बनायें -

-अब इस भोजपत्र को रोगी के मस्तक पर बांध दे। ऐसा करने से उसका रोग धीरे -धीरे दूर होने लगता है। अा आवश्यकता होने पर यह प्रयोग लगातार कई दिनों तक करना चाहिये।
 


सुख- शान्ति के लिए -  पूर्व -वर्णित विधि से तैयार पोटली को अपने घर के पूजा -स्थान पर रखें और उसकी प्रतिदिन धुप -दीप से पूजा करते रहें। यह प्रयोग सभी प्रकार से मंगलदायी होता है। इससे मनुष्य को सुख -शांति और  स्म्रद्धि प्राप्त होती है।



एकमुखी रुद्राक्ष - जिस रुद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से केवल एक धरी होती है - उसे ' एकमुखी रुद्राक्ष ' कहा जाता है। इसे सभी प्रकार के रुद्राक्षों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि - यह साक्षात भगवन शिव का ही स्वरूप है अर्थात - इसमें स्वयं भगवान शिव ही विराजते हैं। इसके दर्शन मात्र से ही मनुष्य का कल्याण हो जाता है तो फिर इसका पूजन करने और इसे धारण करने से कितना अधिक लाभ प्राप्त होगा , इसका अनुमान भी लगाना कठिन है। एकमुखी रुद्राक्ष जिस घर में होता है , वहाँ पर माँ लक्ष्मी विशेष कृपा करती है और उस घर में धन - धन्य की कभी कमी नहीं होने पाती है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वाले मनुष्य को किसी प्रकार का कोई भय नहीं रहता है। इसे धारण करने से सभी प्रकार के अनिष्ट दूर हो जाते है। यह रुद्राक्ष मनुष्य के सभी संकटों और पापो को हर लेता है। यह मनुष्य को मानसिक शान्ति प्रदान करता है।
एकमुखी रुद्राक्ष अत्यन्त दुर्लभ होता है क्योंकि अन्य रुद्राक्षों की अपेक्षा यह कम मात्रा में उत्पन्न होता है। यहाँ पर ध्यान रखने की बात यह है कि - एकमुखी रुद्राक्ष और चौदहमुखी रुद्राक्ष का प्रभाव एक जैसा ही होता है , अतः यदि एकमुखी रुद्राक्ष न मिल पाये तो उसके स्थान पर चौदहमुखी रुद्राक्ष का प्रयोग किया जा सकता है।