आधाशीशी का दर्द दूर करने के लिए - यदि किसी व्यक्ति के सिर में आधाशीशी (अर्धकपारी) का दर्द होता है तो -एक भोजपत्र लाकर उस पर अष्टगंघा से निम्नलिखित प्रकार से यंत्र बनायें -
-अब इस भोजपत्र को रोगी के मस्तक पर बांध दे। ऐसा करने से उसका रोग धीरे -धीरे दूर होने लगता है। अा आवश्यकता होने पर यह प्रयोग लगातार कई दिनों तक करना चाहिये।
सुख- शान्ति के लिए - पूर्व -वर्णित विधि से तैयार पोटली को अपने घर के पूजा -स्थान पर रखें और उसकी प्रतिदिन धुप -दीप से पूजा करते रहें। यह प्रयोग सभी प्रकार से मंगलदायी होता है। इससे मनुष्य को सुख -शांति और स्म्रद्धि प्राप्त होती है।
एकमुखी रुद्राक्ष - जिस रुद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से केवल एक धरी होती है - उसे ' एकमुखी रुद्राक्ष ' कहा जाता है। इसे सभी प्रकार के रुद्राक्षों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि - यह साक्षात भगवन शिव का ही स्वरूप है अर्थात - इसमें स्वयं भगवान शिव ही विराजते हैं। इसके दर्शन मात्र से ही मनुष्य का कल्याण हो जाता है तो फिर इसका पूजन करने और इसे धारण करने से कितना अधिक लाभ प्राप्त होगा , इसका अनुमान भी लगाना कठिन है। एकमुखी रुद्राक्ष जिस घर में होता है , वहाँ पर माँ लक्ष्मी विशेष कृपा करती है और उस घर में धन - धन्य की कभी कमी नहीं होने पाती है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वाले मनुष्य को किसी प्रकार का कोई भय नहीं रहता है। इसे धारण करने से सभी प्रकार के अनिष्ट दूर हो जाते है। यह रुद्राक्ष मनुष्य के सभी संकटों और पापो को हर लेता है। यह मनुष्य को मानसिक शान्ति प्रदान करता है।
एकमुखी रुद्राक्ष अत्यन्त दुर्लभ होता है क्योंकि अन्य रुद्राक्षों की अपेक्षा यह कम मात्रा में उत्पन्न होता है। यहाँ पर ध्यान रखने की बात यह है कि - एकमुखी रुद्राक्ष और चौदहमुखी रुद्राक्ष का प्रभाव एक जैसा ही होता है , अतः यदि एकमुखी रुद्राक्ष न मिल पाये तो उसके स्थान पर चौदहमुखी रुद्राक्ष का प्रयोग किया जा सकता है।
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